सफलता की प्रेरक कहानी - हाँ तो प्यारे बच्चो, "गरीबी, सपने, मेहनत और कामयाबी" कहानी कैसी लग रही है आशा है ये कहानी आपको कुछ न कुछ बेहतरीन करने की प्रेरणा दे रही होगी। निश्चित रूप से अब तक इस कहानी ने आपको अंदर से ज़ोरो से जकड़ा हुआ है तभी आप इसका दूसरा भाग पढ़ने आये हैं। यदि आपने अभी तक इस सफलता की प्रेरक कहानी का पहला भाग नहीं पढ़ा है तो यहां से पढ़िए - यहाँ क्लिक कीजिए
हमने इसका पहला भाग तक पढ़ चुके थे कि किस प्रकार अध्यापिका लाता ने बच्चों की शैक्षिक काबिलीयत को अच्छा होने के बावजूद खराब होना महसूस किया और उनके माता-पिता से इस विषय पर बात की और उनकी प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए उन्हें मनाया। चलिए अब इस भाग से अब आगे बढ़ा जाए। नन्हें बच्चों शुरू करते हैं आगे की कहानी -
सफलता की प्रेरक कहानी । गरीबी, सपने, मेहनत और कामयाबी - भाग -2
कुछ ही महीने बाद, उनकी दर्द सहती दादी माता-पिता द्वारा महंगी दवाई को न खरीद पाने के कारण इन सभी को अलविदा कह देती है। जिससे पूरा घर ही आहत हो जाता है और सभी फूट-फूटकर रोते हैं।
समय बीतते-बीतते, अब सीमा और रोशनी ने 20 की उम्र पार कर ली थी और कुमार 16 का हो गया था। उन सभी ने अध्यापिका लता की मदद के कारण अपनी शिक्षा की योग्यता के दम पर कई पुरस्कार जीत लिए थे।
परंतु बच्चों के बड़े होने के कारण कई और खर्च भी घर में बढ़ गए थे हालांकि बच्चे बहुत समझदार, घर के हालातों को समझकर रहने वाले थे। इसलिए माता-पिता एक कड़ा फैसला लेने पड़ता है। वे सीमा और रोशनी की शादी करने का निर्णय ले लेते हैं और उनके लिए वर ढूंढ लेते हैं।
सीमा और रोशनी को पता चलने पर वे दोनो बिलकुल मना कर देते हैं और ज़ोर-ज़ोर से रोती रहती हैं। कुमार भी इस शादी के खिलाफ होता है और अपनी बहनों का साथ देता है। वे बार-बार एक ही बात दोहराई हैं "अभी हमें और पढ़ना है, हम कुछ बनना चाहते हैं।
उनकी गुज़ारिश से उन पर दया भाव आ जाना तो स्वाभाविक था - "आप कहेंगे तो हम खाना भी नहीं खायेंगे जिससे आपकी कुछ आमदनी बच जाए"। ये सब सुनकर माता-पिता भी बहुत रोते हैं परंतु उन्हें कठोर होना पड़ता है और उन्हें उनकी शादी कराने का कारण समझाते हैं -
"एक तो उनकी एक बड़ी जिम्मेदारी जो एक सिर पर बहुत बड़ा भार होता है वो हल्का हो जाएगा और दूसरा घर में आर्थिक रूप से राहत भी पहुंचेगी..." दूसरे कारण से समझा जा सकता है कि माता-पिता कितने बुरे हालात में थे।
उनकी अध्यापिका लता भी उनकी शादी की खबर सुनकर हैरत में पड़ जाती है कि इतनी होनहार बच्चों का हुनर शादी के बाद बर्बाद हो जाएगा।
ये सुनकर सीमा और रोशनी अपनी आशाओं को मारकर चुपचाप अपने माता-पिता के कहने के अनुसार मन में आंसू छुपाए शादी कर लेती हैं। वर हालांकि बुरे नहीं होते और उनसे हमदर्दी रखते हैं।
ये सब देखकर कुमार अंदर से बहुत टूट चुका होता है। वह कई दिन तक अकेला एक तरफ बैठा अपनी बहनों का नेतृत्व उसके साथ होने के बारे में हर समय सोचता रहता था।
अंदर से अब टूटा होने के कारण कुमार घर में पैसों की वजह से होने वाली घटनाओं को एक-एक करके दिमाग में दोहराने लगता है - पहले शिक्षा-भोजन का अभाव, समाज में माता-पिता का आदर न होना, विद्यालय की वर्दी न होना, घृणा के कारण मित्रों का न होना और उनका उस पर मज़ाक बनाना, अच्छा घर न होना, दादी की मृत्यु, बहनों का ऐसे हालातों में विवाह, आदि।
सोचते-सोचते वह मन-ही-मन-मन ठान लेता है कि अब वो निश्चित रूप से इन चीजों का हल बनेगा ताकि आगे और मुसीबतों का सामना ना करना पड़े और अपने घर के सदस्यों को भी इन परिस्थितियों से बाहर निकालकर उनके जीवन में ख़ुशियाँ भर दे।
वह इतना पढ़ने लगता है कि वह अब दिन-रात एक कार देता है। वह अपना लक्ष्य को इतना स्पष्ट कर लेता है कि उसे वह अपने सामने साफ देख सकता है। वह अपने और अपने लक्ष्य के बीच किसी को भी नहीं आने देता और केवल उसी ओर नज़रे गड़ाए है।
वह एक-एक करके अपने सामने आने वाली चुनौतियों को पीछे छोड़ने लगा - सर्वप्रथम वह अपनी कक्षा में सबसे उत्तम अंक लाने लगा, उसके बाद उसने विद्यालय का नाम भी अलग-अलग प्रतियोगिताओं में जाकर रोशन कर दिया। वह विद्यालय, गांव आदि सब जगह सबका प्रिय हो गया।
सब उसकी प्रशंसा करने लगे परंतु उसके अंदर की आग अभी ठंडी नहीं हुई थी। पढ़ते-पढ़ते उसने आई ए एस की तैयारियां भी शुरू कर दी। ऐसा करने में उसकी पुरानी अध्यापिका लता अब भी मदद कर रही थी और कुछ उसकी स्कॉलरशिप से भी काम होने लगा था।
गांव में उसके नाम की खुशियां मनाई गई जो छोटे से, गरीब घर में पैदा हुआ था, जिसका कोई मित्र भी नहीं था, जिनके घर कपड़े-किताब ख़रीदने तक के पैसे नहीं थे। कुमार भागते हुए गया और अध्यापिका लता को यह खबर उनके पाओं छूकर अपने मुंह से सुनाई जिसे सुनकर उनकी भी आंखों में आंसू आ गए जैसे उनके खुद के बच्चे को यह उपलब्धि मिली हो।
दोनो बहनों को खबर मिलते ही वो फ़ौरन अपने माता-पिता के घर पहुंच गई और कुमार को शुभकामनाएं देते हुए गले से लगा लिया। और अब अकेले में जाकर उसने खुद को थोड़ा समय दिया जिसमें वह उस समय को याद करके और अपने लक्ष्य को पूर्ण होने की खुशी में खूब रोता है। जबकि अब इनके खुशियों के दिन प्रारम्भ हो गए थे।
वह अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करना चाहता था कि कैसे उसके माता-पिता का जीवन केवल संघर्ष में निकला बिना किसी खुशी या चैन के। इसलिए सबसे पहले कुमार ने अपने माता-पिता को एक सुंदर-से सपने जैसा घर उपहार में भेंट किया जिसमें वे सब खुशी से रहने लगे।
अध्यापिका लता को भी एक माँ से कम ना समझा वे जब भी किसी समस्या में होती तो कुमार क्षण भी ना गंवाए उनके घर को दौड़ा चला जाता। उसकी बहनो का सपना जो अधूरा रह गया था उसे पूरा करने का इरादा।
सीमा और रोशनी ने जहाँ अपनी शिक्षा छोड़ी थी उसी पहलू से कुमार ने वो शिक्षा पुनः शुरू कराई और उसे पूरा करने के बाद कुछ सालों में, सीमा और रोशनी ने अपनी अध्यापिका लता को उपहारस्वरूप खुद का भविष्य भी अध्यापिका के रूप में देखने को निश्चय किया।
ये खुशी भी श्रीमती लता के दिल को छू गयी। वे सभी इतने प्रसीद्ध हो गए कि उनके साथ के सहपाठी उनसे बात करने के लिए उत्सुक थे। अंततः सब कुछ ठीक हो गया और उनके जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ भर गयीं।
शिक्षा
लक्ष्य अगर साफ हो और मेहनत साथ हो तो आप आसमान की ऊंचाइयों को भी छू सकते हो।
अंत में, आशा करते हैं आपको कुमार, सीमा, रोशनी और अद्यापिका जैसे पात्रों से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा। जैसे कुमार मेहनती, लक्ष्य को ठानकर उसके पथ पर चलने वाला; सीमा और रोशनी समझदार और ज़िम्मेदार जिनमें अपने माँ-बाप की तकलीफों को देखकर एक त्याग की भावना भी नज़र आई और इसके अलावा अद्यापिका दयालु, मददगार आदि गुणों को खुद में लाकर जीवन बहुत कुछ पाया जा सकता है।
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