प्यारे बच्चों, हमने अब तक राजा अकबर और बीरबल के किस्से कई सुने हैं। जिसमें अकबर बीरबल को अपनी बातों में उलझाकर उनकी परीक्षा लेने का प्रयत्न करते थे और बीरबल अपनी चतुराई और होशियारी से हर बार हर समस्या को सुलझाने में सफल रहते थे। ऐसी ही अकबर और बीरबल की 3 अनोखी कहानियां आज हम पढ़ेंगे।
अकबर हमारे देश के ऐसे राजा थे जो खुद तो पढ़े-लिखे नहीं थे परंतु उनके राजदरबार में जितने भी दरबारी थे वे सभी होनहार और समझदार थे जिनकी मदद से अकबर को कोई समस्या नही आती थी। इन सभी दरबारियों में अकबर के चुनिंदा 9 रत्न ऐसे थे जो अकबर के बहुत करीब और प्रिय थे जिनमें बीरबल एक थे। कहा जाता है बीरबल मज़ाक-ही-मज़ाक-मज़ाक में अकबर को बेइज़्ज़त कर देते थे जबकि अकबर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। ऐसा इसलिए क्योंकि अकबर बीरबल को ऐसा करने के लिए खुद ही मजबूर कर दिया करते थे।
चलिए पढ़ें अकबर बादशाह और बीरबल की कहानियां
अकबर और बीरबल की 3 अनोखी कहानियां
हमने अकबर बीरबल की कई किया सुनी तो हैं परंतु शायद वो किस्सा नहीं सुना होगा कि अकबर और बीरबल की पहली भेंट किस तरह हुई। वैसे तो इनकी पहली भेंट के लिए भी बहुत-सी कहानियां प्रचलित हैं जो अब पढ़ेंगे।
अकबर और बीरबल की कहानियां
1. अकबर और बीरबल की पहली भेंट
राजा-महाराजाओं को अपने भोजन के बाद पान खाने की आदत होती थी, अकबर की भी यही आदत थी। उन्होंने अपने और अपने पूरे राज-परिवार को केवल पान खिलाने के लिए एक मुरलीधर नाम के व्यक्ति को नियुक्त कर रखा था। जब एक रात मुरलीधर रोज़ की तरह अकबर के बाद उनकी सभी बीवियों को पान खिलाने के बाद घर जाने लगा तभी एक सिपाही उसके सामने आ पड़ा और
उससे कहा- "अरे..मुरलीधर जहाँपना(अकबर) का हुक्म है कि तुम उनके सामने प्रकट हो।"
मुरलीधर ने पूछा - "क्यों भाई, क्या जहाँपना को और पान खाने हैं?"
सिपाही ने उत्तर देते हुए कहा - "वो सब मुझे नहीं पता, बस उनका हुक्म है कि तुम उनसे जाकर मिलो"
मुरलीधर - "ठीक है भाई"
इसके पश्चात मुरलीधर फौरन अकबर से जाकर मिलता है। अकबर उसे बड़ी-ही ठोस आवाज़ में अगली सुबह आते समय 1 किलो चुना लाने को भी कहते हैं और मुरलीधर "जैसा आपका हुक्म जहाँपना" कहकर सोचते-सोचते घर की ओर चल पड़ता है कि महाराज 1 किलो चूने का आखिर करेंगे क्या।
अगली सुबह जब वह रास्ते में पान वाले से 1 किलो चूना लेकर महल को जाने लगता है उनका प्रिय मित्र महेश दस उन्हें रास्ते में मिल जाता है।
"अरे.. भाई मुरलीधर राम-राम...." महेश कहता है।
"राम-राम भाई महेश" - मुरलीधर जवाब देता है।
"ये क्या हाथ में इतना बड़ा थैला उठाये महल जा रहे हो" - महेश पूछता है।
"भाई महेश कल हुज़ूर(अकबर) ने मुझे 1 किलो चूना संघ लाने का आदेश दिया था वही लिये जा रहा हूँ।" - मुरलीधर उत्तर देता है।
अब महेश दास भी इसी के बारे में सोचने लगता है और पूछता है कि "क्या कोई समारोह होने वाला है?"
"नहीं.., ऐसा तो कुछ नहीं लगता" मुरलीधर चौंकते हुए उत्तर देता है।
महेश अनुमान लगाता है "तो ज़रूर ये चूना महाराज ने खुद पान खाने के बाद लाने का तुम्हे हुक्म दिया होगा?" मुरलीधर अब पूर्ण रूप से अचंबित हो जाता है - "बिल्कुल सही भाई महेश, पर तुम्हे कैसे पता?"
तो महेश उसे उत्तर देता है - "मुरलीधर ये समझ जाओ कि शायद ये चूना तुम्हारे लिए ही है, तुम्हे ही इसे खाना है महल जाने से पहले 1 किलो घी भी खाकर जाना क्योंकि चूने का प्रभाव केवल घी ही काट सकता है।"
इतना कहकर महेश वहां से चल देता है। अब फिर एक बार मुरलीधर विचार करने लगता है कि भला जहाँपनाह मुझे क्यों इतना चूना खिलाने को देंगे परंतु मुरलीधर यह भी जानता था कि बीरबल की कही बात कभी गलत नहीं होती थी। इस कारण वह पहले अपने घर जाता है।
वहीं दूसरी ओर अकबर मुरलीधर के समय पर ना आने पर और क्रोधित होता चला जाता है। इतने में मुरलीधर भी राजदरबार में पहुंच जाता है।
अकबर मुरलीधर से सवाल करता है - "क्यों मुरलीधर तुम्हे क्या लगता है, मैंने तुमसे इतना चूना क्यों मंगवाया है..?"
"पता नहीं हुज़ूर" - मुरलीधर उत्तर करता है।
अकबर बताता है - "जो पान कल तुमने मेरे लिए बनाया था उसमें तुमने चूना बहुत डाल दिया था जिसकी वजह से मर मुँह काट गया था..
अब तुम्हारी यही सज़ा है कि ये सारा चूना तुम अकेले अभी और एक साथ खाओगे.."
इतना सुनने के बाद मुरलीधर महेश दास को मन ही मन धन्यवाद करने लगता है और चूने को खाना शुरू करता है। वह सारा चूना चट कर जाता है और यह देख अकबर दंग रह जाता है।
अकबर हैरानी से पूछता है - "ऐसा कैसे संभव है कि कोई इतना चूना खाकर भी जीवित खड़ा है, बोलो मुरलीधर ऐसा कैसे किया?"
मुरलीधर बताता है - "क्षमा कीजियेगा महाराज परंतु महल लौटने से पहले मुझे मेरा एक मित्र मिला था जिसने मेरे हाथ में आपके द्वारा मंगाया चूना देख पहले ही अंदाज़ साफ लिया कि आप मुझे ये खिलाने वाले हैं और उसने मुझे घी खाने की सलाह दी ताकि ये चूना मेरा कुछ न बिगाड़ पाए"।
अकबर यह सुनकर चौंक जाता है कि उस व्यक्ति ने केवल कुछ क्षणों में होने वाली घटना का सटीक अनुमान पहले ही लगा लिया। अकबर मुरलीधर को अपने उस दोस्त को बुलाने का हुक्म देता है। मुरलीधर भी अकबर दौड़ा-दौड़ा महेश दास को अकबर के सामने प्रस्तुत करता है। असल में, अकबर महेश की चतुराई और समझदारी से बहुत प्रसन्न होता है और महेश दास से उसका नाम बदलकर बीरबल रखने के बाद उसे अपने रत्नों में शामिल कर लेता है।
देखा बच्चों, किस तरह बीरबल और अकबर की पहली मुलाकात हुई। हालांकि इसके अलावा भी काफी सारी कहानियां सुप्रसिद्ध इनकी पहली मुलाकात को लेकर फिर भी ये कहानी बाकियों से अधिक सच्ची और मुख्य मानी जाती है।
2. जो होता है अच्छे के लिए ही होता है
एक बार अकबर राजदरबार में हाथ पर मलहम-पट्टी लगाए अपनी राजगद्दी पर विराजमान रहते हैं।
सब उनसे पूछते हैं कि "जहाँपनाह ये हुआ क्या है? सब ठीक तो है ना? ये मोच आयी कैसे?"
अकबर बताते हैं कि "कल तलवार का अभ्यास करते समय हाथ काट गया!!"
तो सभी लोग अफसोस मनाने लगे "हुज़ूर जो हुआ गलत हुआ, आपको धयान से रहना चाहिए था.."
यहां सबके विरुद्ध बीरबल इस चीज़ का उकेरा कहता है "जो होता है अच्छे के लिए ही होता है"
अकबर बहुत क्रोधित होता है, वह कहता है -"क्या कहा बीरबल, तुम्हे पता भी है तुम क्या कह रहे हो!!, यहाँ में घायल हूँ और तुम कहते हो जो मेरे साथ हुआ वो अच्छा हुआ"
बीरबल दोहराता है - "जी हाँ, जो हुआ है अच्छे के लिए ही हुआ है।"
अकबर का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ जाता है और उसे कारावास में डाल देने की सज़ा सुनता है। अपने सभी कार्यों के बाद अकबर अपने मनोरंजन के लिए शिकार पर अकेले निकल पड़ता है। वह शिकार की तलाश में जंगल में इतना आगे घुस जाता है कि उसे पता ही नहीं होता वह कहाँ पहुंच गया है। असल में जंगल में रहने वाले कबीलाई लोगों के हत्थे चढ़ जाता है जिसे वो अपने साथ अपने स्थान पर ले जाते हैं। कबीलाई लोगों को कोई मतलब नहीं था कि वह कौन है और नाही वे अकबर को जानते थे।
अब अकबर खूब गुहार लगाता है "छोड़ दो, माफ करदो, हे..भगवान बचा लो आज"।
आज के दिन ही कबीले के लोगों का एक रिवाज़ होता है किसी मनुष्य की बली देने का, जिसके लिए कबिलाई लोगों ने अपनी बली अकबर के रूप में ढूंढ ली थी। अकबर बहुत डरा हुआ होता है। ना तो वह अपने मंत्री और सिपाहियों को खुद को यहां से निकालने का संदेश भेज सकता है और ना ही वह खुद को यहां से बचा सकता है।
अब बली का समय करीब आता जा रहा था और अकबर की वो दरिंदे बली के लिए इंतेज़ार कर रहे थे। जब बाली का समय हुआ तभी कबीले के सरदार ने उसकी गर्दन पर तलवार रख दी परंतु मारने से कुछ क्षण पहले कुछ लोगों ने ध्यान दिया कि उसकी उंगली पर पट्टी बंधी है उसी क्षण सबको रोक दिया गया।
सरदार से आदेश आया कि "इसे खोल के देखो क्या इसे कोई चोट लगी है"।
"हाँ सरदार",जवाब आता है।
उसी समय अकबर की बली देना रोक दिया जाता है और सबकी आंखें किसी बहुत बड़े अनर्थ से बचे एक व्यक्ति की भांति खुली की खुली रह जाती है। इसका कारण यह था कि बाली के लिए केवल उसे ही रखा जा सकता था जिसे कोई भी चोट न लगी हो।
अकबर की डैश कुछ ऐसी होती है जैसे उसे कोई नया जीवन मिला। वह बहुत खुश होता और तभी उसे बीरबल की बात याद आती है जैसा उसने कहा था "जो होता है अच्छे के लिए ही होता है"। अकबर बीरबल को धन्यवाद करते नहीं थकता। वापस महल पहुंचते ही सबसे पहले बीरबल को कारावास से बाहर निकलने का हुक्म देता है।
दरबार में सभी को इस घटना के बारे में बताता है और यह भी बताता है जो बीरबल ने बताया वह बेशक पूरा सत्य है कि "जो होता है अच्छे के लिए ही होता है"।
3. सबसे सुंदर बच्चा
एक बार अकबर राजदरबार में अपने पुत्र जिसकी उम्र कुछ ही वर्ष थी, को गोद में बैठे उसकी बड़ी तारीफ करता है।
अकबर कहता है - कितना सुंदर पुत्र है, मुझे लगता है इस दुनिया में कोई भी बच्चा इतना सुंदर नहीं है..!!"
दरबार में सभी को शहंशाह(अकबर) की हाँ में हाँ मिलानी पड़ती है और झूठी तारीफ करनी पड़ती है कि "बेशक तहत सुंदर बच्चा है, खुदा ने ज़रूर पूरा समय लेकर बच्चे को नवाज़ा है, आप बहुत खुशकिस्मत हैं हुज़ूर जो आपके यहाँ दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा जन्म है।"
बड़ी खुशी और बच्चे को देख चुलबुलेपन का माहौल था। इन सब से अलग बीरबल बिल्कुल शांत रहता है और बस सबकी बातें सुनता रहता है। परंतु जब उससे उसकी राय पूछी जाटी है तो बीरबल इस बात से साफ इनकार कर देता है कि ये बच्चा दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा है।
बीरबल कहता है - "माफ कीजियेगा हुज़ूर परंतु ये बच्चा दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा नहीं हो सकता"।
अब माहौल एक दम से पूरा विपरीत हो जाता है। सब अकबर के होने वाले क्रोध से खडेचो जाते हैं।
वहां अकबर बहुत क्रोधित हो गया और उसने बीरबल को चुनौती दी और कहा - "बीरबल तुम हंट नहीं हो तुमने कह दिया है अपनी इस मूर्खता से कितना बड़ा अपराध कर दिया है। अब तुम्हें मेरे सामने इस दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा खड़ा करना होगा तुम्हारे पास 48 घंटे हैं और यदि किसी कारण से नहीं ला पाये तो तुम्हें 48 के बाद सीधा मौत की सज़ा सुनाई जाएगी।"
परंतु बीरबल को कहाँ की फ़िक्र थी वह जो भी कहता सोच-समझके कहता। वो भी लग गया अपना जवाब ढूंढने। चारों ओर ढूँढते-ढूंढते वह अपना जवाब आखिरकार ढूंढ ही लेता है। इस प्रकार 48 घंटे पूरे हो जाते हैं और दरबार में बीरबल पेश होता है। सभी लोग उसे अकेला देखकर बड़े परेशान हो जाते हैं क्योंकि अब उसे मौत की सज़ा होने वाली थी।
उसी तरह से अकबर भी उसे अकेला देख उससे पूछता है - तुम अकेले हो!, क्या तुम भूल गए कि पिछली बार तुम्हे इस दुनिया का अबसे सुंदर बच्चा मेरे सामने पेश करना था जिसके लिए तुम्हे 48 घंटे दिए गए थे"
"जी महाराज मुझे बखूबी याद है" - बीरबल बड़ी सरलता से कह देता है।
"तो कहाँ है वो बच्चा" - अकबर फिर पूछता है।
"हुज़ूर, वो तो नहीं है मेरे साथ" - बीरबल बताता है।
"ठीक है बीरबल, फिर तैयार हो जाओ अपनी सज़ा सुनने के लिये" - अकबर कहता है।
"हुज़ूर सज़ा देने से पहले मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैनें बच्चा ढूंढ तो लिया है परंतु वो यहां नहीं आ सकता" - बीरबल अपनी कही बात को साफ करता है।
"वो यहां नहीं आ सकता? तो मैं कैसे मान लूँ कि तुमने वाकई बच्चा ढूंढ लिया है या वो सच में दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा है? - अकबर कड़क आआवाज़ में पूछता है।
"वो यहाँ नहीं आ सकता परन्तु हम वहाँ उससे मिलने जा सकते हैं" - बीरबल समझाता है।
"ठीक है तो अभी तैयारी करो चलने की, हम अभी उससे मिलेंगे" - बीरबल घोषित करता है।
"रुकिए शहनशाह, हमें वहां जाने के पहले अपने वस्त्र बदलने होंगे" - बीरबल कहता है। अकबर वस्त्र बदलने का कारण जाने की कोशिश करता है।
"इसका जवाब आपको वहां चलने पर ही बताऊंगा" - बीरबल जवाब देता है।
इतनी बात-चीत होने पर दोनों अपने-अपने घोड़ों पर सवार बच्चे से मिलने चल पड़ते हैं। उस स्थान पर पहुंचने पर दोनों अपने घोड़ों से उतरकर एक पेड़ के पीछे छिपक जाते हैं। दिखता है एक बच्चा वहाँ गंदा-सा कीचड़ में खेलते हुआ पूरा मैला, नंगा-काला बदन जो कहीं से भी खूबसूरत लग ही नहीं सकता था।
"ये..ये.. गंदा-बदसूरत बच्चा तुम मुझे दिखाने यहाँ लेकर आये हो और कहते हो कि ये दुनिया का सबसे बच्चा है.." - अकबर चिल्लाकर गुस्से से बीरबल पर बार पड़ता है।
इतनी तेज आवाज़ सुनकर ज़ोर-ज़ोर से बच्चा रोने लगता है और इतने में ही एक औरत ऐसा कहता अकबरर को सुन लेती है क्योंकि वह नहीं जानती थी कि वह शहनशाह अकबर है दोनों पर आग बबूला हो जाती है और उन पर वही कीचड़ फेंकने लगती है और अपने उस बच्चे को चुप कराती है। यह होता देख वे दोनों खुद को बचाकर वापस महल चले आते हैं।
महल पहुँचने के बाद, अकबर गुस्से में पूछता है - "ये क्या मज़ाक है बीरबल, तुम्हारी वजह से न जाने हमें क्या-क्या झेलना पड़ा और तुम्हें किस प्रकार वह बच्चा सुंदर लगा, मृत्युदंड के लिए तैयार हो जाओ।"
बीरबल शांत करते हुए सब कुछ स्पष्ट करता है - "शहनशाह, वह बच्चा बेशक दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा न हो लेकिन वह अपनी उस मां के लिए इस दुनिया का ही नकीं पूरे ब्रह्मांड का सबसे सुंदर बच्चा है। उसी प्रकार हर बच्चा अपने माँ-बाप के लिए सबसे प्यारा और सुंदर बच्चा होता है। यदि मैं आपको वस्त्र बदलकर एक साधारण व्यक्ति का भेष धारण करने को न कहता तो शायद वो माँ अपना असली प्रतिक्रिया ना देती या वो भी आपकी हाँ में हाँ मिला देती।"
यह सुनकर सबकी आंखें खुल जाती हैं और सभी बीरबल की तारीफ करते हैं।
"वाह..बीरबल वाह, तुम सच में एक अमूल्य रत्न हो, बेशक तुमने मेरी आँखें खोल दी और मुझे सच्चाई दिखा दी"।
मेरे प्यारे साथियों, यहाँ इन कहानियों का अंत होता है परंतु हमसे जुड़े रहिएगा, अब अकबर और बीरबल की मज़ेदार कहानियों का सिलिसिला चलता रहेगा। ऐसी बहुत से किस्से हैं जिनके बारे में हम आगे अकबर और बीरबल की कहानियां हिंदी में with moral मनोरंजन और बीरबल की होशियारी को देखने के लिए पढ़ते रहेंगे। साथ ही यदि आपको प्रेरणादायक-कहानियां या शिक्षाप्रद-कहानियां में ररोची है तो भी नटखट कहानियाँ के साथ बने रहें। हम ऐसी प्यारी-प्यारी कहानियाँ लाते रहेंगे।



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